Monument List
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Bara Imambara , Chota Imambara 50/- 25/-
Bhool-Bhulaiya 40/- 20/-
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Picture Gallery 20/- 10-
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About Chota Imambara

Chota Imambara

Built by Nawab Mohammad Ali Shah, the Chhota Imambara or the Hussainabad Imambara stands to the west of the Bara Imambara. This Imambara was built in seven years from 1837 to 1842. Constructed in Indo-Arabic style at a cost of twelve lakhs of rupees, the Chhota Imambara is also the tomb of Nawab Mohammad Ali Shah who died in 1842. Unlike the Bara Imambara, a dome of this Imambara rises at the centre of the structure of the Imambara. It was popular for chandeliers, mirror work, stuccos and other ornamental embellishments, many of which disappeared during the Sepoy Mutiny in 1857. Like the Taj Mahal, there is a long rectangular pond which leads to the main monument. This is the only architectural achievement of Nawab Mohammad Ali Shah.

Source provided by Mr. Vincent Van Ross

लखनऊ शहर के हुसैनाबाद क्षेत्र के इस इमामबाड़े को अवध के तीसरे बादशाह मोहम्मद अली शाह ने 1839 से 1842 में बनवाया था। इसके साथ ही साथ हुसैनाबाद में जिलोखाना, शाही हम्माम, हौज, शाही कुआँ, रसद गाह, मीना बाजार, वेधशाला, सराय, सतखण्डा, (नौखण्ड), रईस मंजिल, शरीफ़ मंजिल और गेंदख़ाने की इमारतें बनीं। इन कुल इमारतों का झुण्ड जिसे आज हुसैनाबाद कहा जाता है, किसी ज़माने में हिन्दुस्तान का बेबीलोन समझा जाता था। इमामबाड़े पर कमरख़ीदार सुनहरा गुम्बद है, जो सुनहरे बुर्जी और खुबसूरत कलियों से सजा हुआ है। गुम्बद के षिखर पर अर्द्धचन्द्र की गोद में उगता सूरज है, जो अवध का प्राचीन चिन्ह है और हिन्दू-मुस्लिम एकता का गवाह है। इस इमामबाड़े के परिक्षेत्र में बादशाह मोहम्मद अली शाह ने अपनी प्यारी बेटी जनाबे असिया का मकबरा बनवाया, जो ताजमहल की याद ताज़ा करता है। रौजे़ पर डिजाइनों में कुरआन की आयतें खुबसूरती के साथ लिखी गयीं है।